सफलतम व्यक्तिओं एवम सफलता के लिए कार्यरत युवको की पहचान एक ही है, के वे संकीर्ण क्षेत्र में सिमित नहीं रहते । घर परिवार और थोडासा धन ही सबकुछ है ऐसा वे नही मानते, इसके अलावा भी वहुत से कार्य एवं कर्तव्यों के साथ ही अपने देश, धर्म, संस्कृती एवं समाज की जिम्मेदारीयाँ भी वे बखुबी समझते है और उनकी सामजिक आवश्यकताएं पूरी करने के लिए वे बहुत कुछ करते है, इसी धारणा के साथ मै श्रीमती निलीमा पी. हारोडे सद्यस्थित्तीगत युवाओ की सोच, मानसिक स्थिती, मनोव्यवस्था के बारे ने अपने विचार प्रकट करती हूँ।
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प्रत्येक मुनष्य को अपने समाज की सेवा का कार्य करना आवश्यक एवं पुनीत कार्य हैं । किसी विद्वान ने भी ठीक कहा है कि “जो व्यक्ति अपने समाज को सेवा नहीं कर सकता, उससे देशहित को अपेक्षा करना व्यर्थ है ।
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